"न कर इतना उजाला तू, कि आंखें चकमका जायें।
मगर हो रौशनी इतनी, कि दुनिया जगमगा जाये।
ये माना रौशनी जग में, इबारत लिख रही प्रतिपल।
इमारत है बड़ी ऊंची, कहीं ना चरमरा जाये।"
Tuesday, 27 August 2019
प्रकाश
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"न कर इतना उजाला तू, कि आंखें चकमका जायें।
मगर हो रौशनी इतनी, कि दुनिया जगमगा जाये।
ये माना रौशनी जग में, इबारत लिख रही प्रतिपल।
इमारत है बड़ी ऊंची, कहीं ना चरमरा जाये।"
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