Tuesday, 9 June 2020

अपना अपना दर्द (गजल)

ताजातरीन ग़ज़ल - "अपना-अपना दर्द"

कुछ दर्द तुम्हारा अपना है, कुछ दर्द हमारे अपने हैं।
हम तुमसे पूछे कितना है, तुम हम से पूछो कितने हैं?

तुम अपने गम में खोये हो, हम अपने गम में रोते हैं।
ना तुम हमको समझे हो, ना हम तुमको समझे हैं।

तुम तैर चुके हो जीवन नदिया, हम बीच भंवर में डूब रहे।
तुम ख्वाब सजाना छोड़ चुके, हम देख रहे कुछ सपने हैं।

हालात बदलना चाहे हम, तुम अपने हाल में जीते हो।
तुम अपने हाल में जलते हो, हम अपनी जिद में जलते हैं।

पांव तुम्हारे डगमग डगमग, हम पांव जमाना चाह रहे।
इक मुश्किल कोशिश जारी है, मरना है या मिलने हैं।

हैं हार रहे हम दोनों ही, इस जीवन चौसर की बाजी।
कुछ गड़बड़ बाजी तेरी थी, कुछ उल्टे पांसे मेरे हैं।

हम दर्द तुम्हारा ले न सके, तुम साथ हमारा छोड़ चुके।
कुछ शिकवा हमको तुमसे है, कुछ तुमको हमसे शिकवे हैं।

©विन्ध्येश्वरी