खुदा देखो अदा उनकी, अदाएं भूल जाओगे।
सदा उनकी सुनोगे सब, सदाएं भूल जाओगे।
तबस्सुम शोखियां लब पर, गिराती बिजलियां सब पर।
गिरेगी बिजलियां तुम पर, दुआएं भूल जाओगे।
जो भूले से भी गुजरोगे, गली उनकी फरिश्तों फिर।
हसीं रंगीन जन्नत की, फिजाएं भूल जाओगे।
अजब मासूमियत उनमें, नजाकत है सदाकत है।
अगर सौ कत्ल भी कर दे, खताएं भूल जाओगे।
©विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी 'विनय'
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