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Tuesday, 6 October 2020

सागर से जैसे मय छलके (गजल)

Posted by Dr. Vindhyeshwari Prasad Tripathi at 22:26 No comments:
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Labels: आशिकी वाली शायरी, कविता, गजल, मुहब्बत का शेर, शायरी
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अपनी आग को जिंदा रखना

Posted by Dr. Vindhyeshwari Prasad Tripathi at 22:25 No comments:
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Labels: आशिकी वाली शायरी, गजल, दिलजली शायरी, मुहब्बत की शायरी, शायरी, शेर
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कण कण में जो व्यक्त है, वो कविता में अभिव्यक्त है।

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