चांद जैसा न खुद को बताया करो।
हीर मणि की न कीमत घटाया करो॥
चांद के हुश्न को लूट लाये हो तुम।
माल लूटा हुआ है छुपाया करो॥
मैं भी बहकूं ज़रा तुम भी बहको ज़रा।
फासले दूरियां सब मिटाया करो॥
कातिलाना नजर कत्ल कर जायेगी।
ये नजर तुम न सब पर चलाया करो॥
बस तुम्हारी अदा से है घायल शहर।
उंगलियां यूं न सब पर उठाया करो॥
संगमरमर हसीं तुम कली नाजुकी।
ख्वाब में ही सही पास आया करो॥
सात सुर में सजी इक मधुर रागिनी।
कान में तुम मेरे घोल जाया करो॥
ये गजल मेरी अर्पण है तुमको प्रिये।
फूल से होंठ से गुनगुनाया करो॥
हीर मणि की न कीमत घटाया करो॥
चांद के हुश्न को लूट लाये हो तुम।
माल लूटा हुआ है छुपाया करो॥
मैं भी बहकूं ज़रा तुम भी बहको ज़रा।
फासले दूरियां सब मिटाया करो॥
कातिलाना नजर कत्ल कर जायेगी।
ये नजर तुम न सब पर चलाया करो॥
बस तुम्हारी अदा से है घायल शहर।
उंगलियां यूं न सब पर उठाया करो॥
संगमरमर हसीं तुम कली नाजुकी।
ख्वाब में ही सही पास आया करो॥
सात सुर में सजी इक मधुर रागिनी।
कान में तुम मेरे घोल जाया करो॥
ये गजल मेरी अर्पण है तुमको प्रिये।
फूल से होंठ से गुनगुनाया करो॥
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