Saturday, 23 December 2017

उंगलियां यूं न सब पर उठाया करो - 1 (गजल)

कर्ज लो तो समय पर चुकाया करो।
एक रोटी भले कम ही खाया करो॥ 

दाग दामन में अपने लगा हो अगर।
उंगलियां यूं न सब पर उठाया करो॥ 

खाक छानेगी फाइल पड़ी मेज पर।
फाइलों पे वजन कुछ चढ़ाया करो॥ 

वजन से ही सबकुछ है सम्भव नहीं।
भोग बाबू को भी कुछ लगाया करो॥ 

राह में तुम मिले मुस्करा चल दिये।
हाथ तो रुक के हमसे मिलाया करो॥ 

बात मेरी सुनो और अपनी कहो।
सिर्फ अपना ही दुक्खड़ा न गाया करो॥ 

रूठी बीबी कहे कैसे सौहर हो तुम।
ले चलो हमको पिक्चर दिखाया करो॥ 

कौन साथी बुढ़ापे का? कोई नहीं।
धन बुढ़ापे के खातिर बचाया करो॥

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