Saturday, 23 December 2017

उंगलियां यूं न सब पर उठाया करो-2 (गजल )

मछलियां जाल में न फंसाया करो।
ऐ मछेरे तरस कुछ तो खाया करो॥

खा गये मुर्गियां भेंड़ औ बकरियां।
बाघ कुत्ता न खुद को कहाया करो॥

पेट नेमत खुदा की भरण के लिए।
इसको शमसान तुम न बनाया करो॥

फूल फल अन्न दिया है खुदा ने हमें।
शाक आहार भोजन पकाया करो॥

इसमें पोषण बहुत ही विटामिन भरे।
मांस आहार खुद को बचाया करो॥

खून जीवों का तुम मत करो भूलकर।
प्यार करुणा दया मन में लाया करो॥

फल खाओ पिओ दूध को ठाट से।
हाथ मूंछों पे अपने फिराया करो॥

सेहत अच्छी रहे थोड़ी कसरत करें।
प्रात ही सेर करने को जाया करो॥

हम रोगी हुये इसके दोषी हैं हम।
उंगलियां यूं न सब पर उठाया करो॥

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