अगर नाराज हो जाना, वजह मुझको बता देना।
खताएं हो गयीं मुझसे, जो मन चाहे सजा देना।
बुरा मैं हूँ कमीना हूँ, मगर तुम मोम जैसे हो।
अगर ये हो सके तुमसे, गुनाहों को भुला देना।
तुम्हारे बिन अधूरा हूँ, मेरी तस्वीर बाकी है।
हसीं रंग दे के अपना तुम, इसे पूरा बना देना।
मुहब्बत जैसी चीजों से, तुम्हारा दिल जो भर जाये।
हमारे
©विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी 'विनय'
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