हरे भरे बाग बीच, फूल एक ज्यों नवीन,
कोमल अमल पंख, वो मंद मंद खोलते।
बाल भगवान याकि, संत निर अभिमान,
शिव जोगी ध्यान धरे, कार कैलाश पे॥
शब्द वाक्य छंद वाक चातुरी न आये तुझे,
रसना न बोलती है, नैन तेरे बोलते।
कोटि कोटि कामदेव, कोटि देव तैंतीस औ,
मेरी जान कुरबान, तेरी प्यारी मुस्कान पे॥
©विन्ध्येश्वरी
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